Tuesday, February 6, 2018

संपूर्ण विकास की औचित्य...
90 दशक मै तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीब गांधी जी ने यहा कहा था कि, जब केंद्र से 100 रुपया आर्थिक मदत राज्यों को भेजा जाता हैं, तब देश कि ग्रामीण इलाकों मै पहुँचते पहुँचते सिर्फ 1 रुपया  ही पहुँच पाता है। ये स्टेटमेंट आज भी 100 प्रतिशत यथार्थ भी है। कियूकि, आज भी देश भर मैं योजनाओं कि यही हाल हैं। चका चौंक तिब्र गति से बढ़ रहा है, सहर मैं कहीं ना कही, हाल ही घटनाओं से ये प्रतीत हो रहा है कि,  समाज मै किस कदर जागृरुकता की अभाव है। देश की राजधानी नई दिल्ली मै, बीते 2012 को निर्भया दुखद घटना के बाद, ‘’ वर्मा कमेटी ‘’ की स्थापना किया गया था। मकसद, यही था कि, समाज मै जो लड़कियों तथा महिलाओं कि प्रति अमानवीय घटनाई हो रहा है] उस को रोकना।  वर्मा कमेटी ‘ की तमाम सुफ़ारिश तत्कालीन ड़ा.मोनमोहन सरकार ने त्वरित क्रियान्वित हेतु संसद से बिल भी लाया गया था; जो सहारनीय था।  खैर, आज मौजूदा सरकार भी लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के  उनके अधिकार लाने के लिए भी कोशिश कर रहा है। समस्या, कोई भी पॉलिसी को क्रियान्वित की हैं। यहा, लोगों को जागरूकता की बात  है। जो कि, सभी सरकारों की तमाम पहल लाने के बावजुड़ सही रूप से आगे बढ़ नहीं रहा हैं। एसे कई सारे उदाहरण है। जेसे की, देश मै विभिन्न राजों सरकारों के तरफ से लड़कियों की शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने के लिए फीस माफ तक प्रबधान रखा है। परंतु, हकीकत यही है की, ग्राजुएशन के बाद, लड़कियों की शिक्षा की दर देश भर मैं औशतन काफी कम हैं। यदि, हम आदिवासी ग्रामीण इलाक़ों मै यह स्थिति काफी दयनीय है। तो फिर, कही ना कही क्रियान्वित की सही रूप से आगे ना बढ़ना एक चुनौती हैं और दूसरा कारण लोगों मैं आज भी मानसिकता मै बदलाव सही रूप से नहीं आया है। हमे इस कमियां को दूर करना होगा। तब जा कर, समाज की सर्वांगीन विकास होगी। कियूकि, एक पहिया से कोई भी गाडियाँ आगे नहीं बढ़ता है। ठीक अनुरूप, समाज और परिवार की विकास के लिए सभी का आगे बढ़ना जरूरी है।। जय हिन्द।।